लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार, धार्मिक आयोजन की शुरुआत रात 12 बजे विधि-विधान के साथ की जाएगी। यह पूजा क्षेत्र में आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र मानी जाती है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
आयोजन का समापन 17 अप्रैल को शाम 7 बजे प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा। इस दौरान भव्य धार्मिक कार्यक्रमों और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलेगा। इस पूजा की ख्याति इतनी अधिक है कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
आयोजन की जिम्मेदारी अध्यक्ष भगवान शेखर और रघुनंदन शेखर सहित पूरा परिवार निभा रहा है। परिवार के सदस्य इस आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं।
साधकों के अनुसार, यह परंपरा उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियां भी इस आध्यात्मिक विरासत को संभालते हुए इसे आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।