लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तेल कारोबार पर दोबारा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MoU) की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाली अस्थायी छूट वापस ले ली है। यह छूट पहले एक अंतरिम समझौते के तहत दी गई थी, जिससे ईरान को सीमित अवधि के लिए तेल निर्यात जारी रखने की अनुमति मिली थी। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान की ओर से समुद्री क्षेत्र में हुई कथित कार्रवाइयों के जवाब में उठाया गया है।
इस फैसले के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान ने अमेरिका पर समझौते की भावना के उल्लंघन का आरोप लगाया है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौते का पालन दोनों पक्षों के व्यवहार पर निर्भर है और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के नए नेतृत्व और मोहतबा खामेनेई से जुड़े राजनीतिक हालात भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बने हुए हैं। अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़ते तनाव का असर मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ते हैं तो क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई है।