लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम कानूनी सवाल पर विचार करने की बात कही है कि क्या किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले दिए गए फैसलों में मतभेद दिखाई दे रहा है और इसे बड़ी बेंच के पास भेजने की जरूरत पड़ सकती है।
यह मामला मेघालय सरकार की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक आरोपी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कुछ फैसलों में गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देने को जरूरी बताया गया है, जबकि एक अन्य फैसले में कहा गया कि आधारों की जानकारी देना जरूरी है, लेकिन लिखित रूप में देना अनिवार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दिए जाने को संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत महत्वपूर्ण अधिकार माना है। हालांकि अलग-अलग पीठों के फैसलों में अंतर के कारण अब इस कानूनी स्थिति को स्पष्ट करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं। बड़ी बेंच का फैसला आने के बाद गिरफ्तारी प्रक्रिया और आरोपी के अधिकारों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।