लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत में E20 जैसे एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने की दिशा में अहम कदम माना जाता है। हालांकि, यदि वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल नहीं है, तो लंबे समय तक इस्तेमाल से कुछ पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सबसे पहले असर फ्यूल पाइप और रबर होज़ पर पड़ सकता है। एथेनॉल में नमी सोखने की क्षमता अधिक होती है, जिससे पुराने रबर पाइप समय के साथ सख्त होकर लीक होने लगते हैं। इसके अलावा सील और गैस्केट भी जल्दी घिस सकते हैं।
फ्यूल पंप और फ्यूल इंजेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं। यदि ईंधन में पानी या अशुद्धियां मिल जाएं तो इनकी कार्यक्षमता कम हो सकती है। वहीं फ्यूल फिल्टर में गंदगी अधिक जमा होने से उसे सामान्य से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा फ्यूल टैंक, मेटल फ्यूल लाइन, स्पार्क प्लग और कुछ मामलों में इंजन के अंदरूनी हिस्सों पर भी असर देखा जा सकता है, खासकर यदि वाहन निर्माता ने E20 या अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए उसे प्रमाणित नहीं किया हो।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन निर्माता द्वारा अनुशंसित ईंधन का ही उपयोग करें। यदि आपकी कार E20-रेडी नहीं है, तो सर्विस शेड्यूल का पालन करें, समय-समय पर फ्यूल सिस्टम की जांच कराएं और किसी भी प्रकार की लीकेज या इंजन मिसफायर की स्थिति में तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें।