लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, इन लोगों ने संपत्ति और सुविधाओं की बजाय देश को चुना ताकि वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें।
भागवत ने कहा कि उस समय की परिस्थितियों में लोगों ने कठिन निर्णय लिया और भारत को अपने सुरक्षित भविष्य के रूप में देखा। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल पलायन नहीं था, बल्कि एक विचार और आस्था पर आधारित चयन था।
उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक दृष्टिकोण मान रहे हैं, जबकि कुछ ने इसे अलग नजरिए से देखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विभाजन से जुड़ी घटनाओं की व्याख्या समय-समय पर अलग-अलग संदर्भों में होती रही है।