लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत में ज्यादातर किराये के मकानों के लिए 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाया जाता है। कई किरायेदारों को लगता है कि एक बार 11 महीने का एग्रीमेंट साइन करने के बाद वे उससे पहले घर खाली नहीं कर सकते, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। एग्रीमेंट में दी गई शर्तों के आधार पर किरायेदार समय से पहले भी मकान छोड़ सकता है।
अगर रेंट एग्रीमेंट में पहले से नोटिस पीरियड, लॉक-इन पीरियड या एग्रीमेंट खत्म करने की शर्तें लिखी हैं, तो दोनों पक्षों को उनका पालन करना होता है। उदाहरण के लिए, अगर एग्रीमेंट में एक महीने का नोटिस पीरियड तय है, तो किरायेदार को मकान खाली करने से पहले मालिक को तय समय के अनुसार जानकारी देनी होगी।
कई एग्रीमेंट में लॉक-इन पीरियड भी होता है। इसका मतलब है कि एक निश्चित अवधि तक किरायेदार या मकान मालिक बिना शर्त एग्रीमेंट खत्म नहीं कर सकते। अगर किरायेदार लॉक-इन पीरियड के दौरान घर छोड़ता है, तो उसे एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के अनुसार कुछ भुगतान करना पड़ सकता है।
अगर एग्रीमेंट में समय से पहले घर खाली करने को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं है, तो किरायेदार और मकान मालिक आपसी सहमति से समाधान निकाल सकते हैं। कई मामलों में मकान मालिक नोटिस अवधि का किराया लेकर किरायेदार को पहले जाने की अनुमति दे देते हैं।
11 महीने का एग्रीमेंट होने का मतलब यह नहीं है कि किरायेदार जबरदस्ती 11 महीने तक रहने के लिए बाध्य है। हालांकि, एग्रीमेंट एक कानूनी दस्तावेज होता है और उसमें लिखी शर्तें दोनों पक्षों पर लागू होती हैं। इसलिए साइन करने से पहले नोटिस पीरियड, सिक्योरिटी डिपॉजिट, लॉक-इन पीरियड और अन्य नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
वहीं, अगर किरायेदार एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी मकान खाली नहीं करता, तो स्थिति अलग हो सकती है और मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले सकता है। तय अवधि खत्म होने के बाद रहने के लिए अतिरिक्त भुगतान या अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं।
इसलिए 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट होने के बाद भी घर खाली किया जा सकता है, लेकिन सही प्रक्रिया अपनाना और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन करना जरूरी है।