लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भारत में इस साल मॉनसून को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने नए अनुमान में कहा है कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसकी बड़ी वजह प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा अल-नीनो माना जा रहा है।
IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक इस साल देश में मॉनसूनी बारिश Long Period Average (LPA) का करीब 90% रह सकती है। मौसम विभाग “सामान्य” बारिश को 96% से 104% के बीच मानता है। यानी इस बार “Below Normal” बारिश की आशंका जताई गई है।
अल-नीनो क्या है?
अल-नीनो एक जलवायु प्रणाली है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। भारत में अक्सर अल-नीनो कमजोर मॉनसून, सूखे और हीटवेव की वजह बनता है।
IMD और अन्य मौसम एजेंसियों के अनुसार जून और जुलाई के दौरान अल-नीनो की स्थिति मजबूत हो सकती है। इसी कारण मॉनसून के शुरुआती महीनों में बारिश कम रहने की आशंका है।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि Indian Ocean Dipole (IOD) की सकारात्मक स्थिति बाद में कुछ राहत दे सकती है। अगर पॉजिटिव IOD विकसित होता है तो मॉनसून के दूसरे हिस्से में बारिश में सुधार संभव है।
मौसम विभाग के अनुसार:
- जून-सितंबर सीजन में कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
- खेती और जल भंडारण पर असर पड़ने की आशंका है।
- खाद्य महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि खरीफ फसलों पर मॉनसून का सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की करीब 60% खेती अब भी मॉनसून पर निर्भर है। ऐसे में कमजोर बारिश का असर धान, दाल और तिलहन जैसी फसलों पर पड़ सकता है।
IMD ने यह भी कहा है कि अगले कुछ हफ्तों में मॉनसून की प्रगति और समुद्री तापमान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर आगे अनुमान में बदलाव भी किया जा सकता है।