अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
पूर्वी एशिया में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के बीच उत्तर कोरिया ने शनिवार को 10 से अधिक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया। इस घटना के बाद जापान और दक्षिण कोरिया ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार मिसाइलों को राजधानी प्योंगयांग के पास स्थित सुनान क्षेत्र से जापान सागर की दिशा में स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:20 बजे दागा गया। परीक्षण के बाद क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई है और अमेरिका, जापान तथा दक्षिण कोरिया मिलकर हालात पर करीबी नजर रख रहे हैं।
जापान कोस्ट गार्ड ने बताया कि एक ऐसी वस्तु देखी गई जो संभवतः बैलिस्टिक मिसाइल थी और वह जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के बाहर समुद्र में गिर गई। जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
मिसाइल परीक्षण के बाद जापान सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में आपात बैठक बुलाई। बैठक में संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के अधिकारी स्थिति की जानकारी जुटाने और संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कहा कि सेना ने निगरानी और सुरक्षा तैयारियों को बढ़ा दिया है। साथ ही अमेरिका और जापान के साथ खुफिया जानकारी साझा की जा रही है ताकि किसी भी संभावित अतिरिक्त मिसाइल लॉन्च की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास को रक्षात्मक बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करना है। हालांकि उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों को अपने खिलाफ हमले की तैयारी करार देता रहा है।
इस बीच उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करते हैं और उत्तर कोरिया की सुरक्षा को चुनौती देने वाले कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया पिछले दो दशकों से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के विकास पर काम कर रहा है। इसी कारण वर्ष 2006 से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उस पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसके बावजूद प्योंगयांग अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच उत्तर कोरिया का यह मिसाइल परीक्षण पूर्वी एशिया में भी सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना सकता है।