लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: ज्ञानवापी, मथुरा और संभल के धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में नया अपडेट सामने आया है। इन मामलों से जुड़े हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रस्तावित मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया है। पक्षकारों का कहना है कि ये मामले कानूनी अधिकारों, संपत्ति विवाद और संवैधानिक सवालों से जुड़े हैं, इसलिए इनका समाधान अदालत के फैसले के जरिए होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने अपनी 'समाधान समारोह 2026' पहल के तहत देशभर के लंबित मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था। इसी क्रम में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल की जामा मस्जिद से जुड़े पक्षों को भी बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का विकल्प दिया गया था।
हालांकि, तीनों मामलों में दोनों पक्षों ने मध्यस्थता प्रक्रिया से दूरी बना ली। पक्षकारों का तर्क है कि इन विवादों में धार्मिक स्थल, अधिकारों और कानून की व्याख्या जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं, जिनका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।
ज्ञानवापी विवाद वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा है, जहां हिंदू पक्ष की ओर से मंदिर से संबंधित दावे किए गए हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों का विरोध करता रहा है। वहीं मथुरा का मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह परिसर से जुड़े दावों को लेकर चल रहा है।
संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़ा विवाद अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के बाद चर्चा में आया था। इस मामले को लेकर संभल में तनाव की स्थिति भी बनी थी और बाद में यह मामला उच्च न्यायालयों तक पहुंचा।
अब इन तीनों मामलों में आगे की सुनवाई नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट और संबंधित अदालतें इन मामलों में उठ रहे कानूनी सवालों पर आगे विचार करेंगी।