गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भाजपा नेता और पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार द्वारा लिए गए नए कर्ज और प्रदेश पर बढ़ते ऋण के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते हुए वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
सूरत नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में राज्य सरकार ने ₹35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है। वहीं, 31 जनवरी 2026 तक हिमाचल प्रदेश का कुल बकाया ऋण ₹1,01,863 करोड़ दर्ज किया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि उधार लेने के बावजूद प्रदेश में कितने नए उद्योग स्थापित हुए, कितने बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान बने तथा कितने स्थायी रोजगार के अवसर पैदा हुए। उन्होंने सरकार से यह भी बताने की मांग की कि ऋण की राशि से प्रदेश के लिए कितनी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार की गईं।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी राज्य की उधारी जारी रहने का मुद्दा भाजपा नेता ने उठाया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल में ₹900 करोड़, मई में ₹500 करोड़ और जून में ₹700 करोड़ तथा जुलाई में ₹700 करोड़ की उधारी के साथ 2026-27 में जुलाई तक कुल ₹2,800 करोड़ का ऋण उठाया गया था।
सूरत नेगी ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीति कर्ज पर निर्भर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से पुराने कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए नए ऋण की जरूरत का तर्क दिया जाता रहा है, लेकिन इसके साथ प्रदेश की आय बढ़ाने और कर्ज पर निर्भरता कम करने के ठोस उपायों की जानकारी भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार दिसंबर 2022 से अब तक लिए गए कुल ऋण, चुकाए गए मूलधन और ब्याज, विकास एवं पूंजीगत कार्यों पर खर्च की गई राशि तथा ऋण से तैयार की गई स्थायी परिसंपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करे।
हालांकि, राज्य सरकार ने वित्तीय दबाव के बीच राजस्व बढ़ाने और वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए विभिन्न कदम उठाने की बात कही है। बजट विश्लेषण के अनुसार, 2026-27 में राज्य की बकाया देनदारियां जीएसडीपी के करीब 40.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सूरत नेगी ने कहा कि प्रदेश की जनता के नाम पर लिया गया प्रत्येक ऋण भविष्य में चुकाया जाना है। उन्होंने सरकार से वित्तीय पारदर्शिता के लिए विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।