हरिद्वार में पार्किंग शुल्क पर सवाल

हरिद्वार. उत्तराखंड के हरिद्वार में घाटों के पास पार्किंग शुल्क को लेकर तीखी नाराज़गी सामने आ रही है।

हरिद्वार के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था प्रशासन और नगर निकाय के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

By : Local News of India
हरिद्वार. उत्तराखंड के हरिद्वार में घाटों के पास पार्किंग शुल्क को लेकर तीखी नाराज़गी सामने आ रही है।

हरिद्वार में पार्किंग शुल्क पर सवाल

नरेंद्र सिंह 
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 


हरिद्वार. उत्तराखंड के हरिद्वार में घाटों के पास पार्किंग शुल्क को लेकर तीखी नाराज़गी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि कुछ ही दिन पहले तक जहां 100 रुपये में वाहन पार्क किया जा रहा था, अब वही शुल्क 150 रुपये कर दिया गया है और वह भी घंटों के हिसाब से वसूला जा रहा है। लोगों का कहना है कि तीर्थनगरी में दर्शन के लिए आने वाले आम श्रद्धालु से इस तरह की वसूली “खुली लूट” जैसी लग रही है।

हरिद्वार, जिसे हरिद्वार के नाम से देश-विदेश में गंगा तट और आस्था के केंद्र के रूप में जाना जाता है, हर साल लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। विशेषकर हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था प्रशासन और नगर निकाय के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी बिना स्पष्ट सूचना या सार्वजनिक आदेश के लागू कर दी गई। कई लोगों का कहना है कि शुल्क बोर्ड पर दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं हैं और घंटों के हिसाब से वसूली में पारदर्शिता नहीं दिखाई देती। इससे बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को असमंजस और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारियों का भी कहना है कि महंगे पार्किंग शुल्क का असर स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है। तीर्थयात्री यदि पार्किंग शुल्क को लेकर परेशान होंगे तो वे कम समय रुकेंगे, जिससे बाजार, प्रसाद, होटल और अन्य सेवाओं पर भी असर पड़ेगा।

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दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष से यह तर्क दिया जा सकता है कि बढ़ती भीड़, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके चलते शुल्क में संशोधन किया गया हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या शुल्क वृद्धि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुई? क्या इसकी पूर्व सूचना दी गई? क्या नगर निगम या संबंधित विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी किया?

“गुड गवर्नेंस” के दावे के बीच यह मुद्दा अब जनचर्चा का विषय बन रहा है। तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं से संतुलित और पारदर्शी शुल्क वसूली प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि शुल्क बढ़ाना जरूरी था तो उसके पीछे का कारण, आधिकारिक आदेश और निर्धारित समय सीमा स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब निगाहें स्थानीय प्रशासन और नगर निगम पर हैं कि वे इस बढ़े हुए पार्किंग शुल्क पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। क्या शुल्क में संशोधन की समीक्षा होगी या व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जाएगा—यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि पार्किंग दरों को स्पष्ट किया जाए और आमजन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डाला जाए।

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