लक्ष्मी शर्मा
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
नई दिल्ली। महिला सशक्तिकरण और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति’ के विजन को साकार करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों के त्वरित निपटान के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार राजधानी में 53 नए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय स्थापित करने जा रही है। इसके लिए तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिए गए हैं।
वैसे इस समय दिल्ली में अस्थायी/एडहॉक आधार पर ऐसे 16 न्यायालय कार्यरत हैं, उन्हें भी स्थायी न्यायालयों में परिवर्तित किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। हम चाहते हैं कि पीड़ितों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा न करनी पड़े। यह कदम न केवल त्वरित न्याय की गारंटी देगा बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित भारत के विजन को भी सशक्त करेगा।
सुरक्षा की भावना
हमीर सरकार के इस निर्णय से दिल्ली की महिलाएं अब और अधिक आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना के साथ आगे बढ़ सकेंगी। यह निर्णय केवल न्यायालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था को सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक पहल है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के 17,000 से अधिक मामले कोर्ट में लंबित हैं।
इन मामलों की धीमी गति से सुनवाई के कारण पीड़ित परिवारों को न्याय पाने में विलंब हो रहा है। कुछ माह पूर्व माननीय उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में महिला सुरक्षा पर गठित टास्क फोर्स की उच्चस्तरीय बैठक में यह विषय को गंभीरता से चर्चा हुई थी। उपराज्यपाल जी ने निर्देश जारी किए थे कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इस दिशा में तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएं।
दिल्ली उच्च न्यायालय
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार उन्होंने इस मसले को बेहद गंभीरता से लिया और संबंधित विभागों को तुरंत निर्देश जारी किए। जिसके बाद विधि विभाग ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय से परामर्श लिया। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को जानकारी दी कि मौजूदा लंबित मामलों और वित्त आयोग की सिफारिशों को देखते हुए 37 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय तत्काल आवश्यक हैं।
उच्च न्यायालय ने इसके इसके अलावा अस्थायी/एडहॉक आधार पर कार्यरत राजधानी के 16 न्यायालयों को भी स्थायी न्यायालयों में परिवर्तित करने की सिफारिश की। इस प्रकार कुल मिलाकर 53 (37+16) नए न्यायालयों की स्थापना का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार हमारी सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि इन न्यायालयों की स्थापना के लिए आवश्यक ढांचा, न्यायिक अधिकारियों के पद और सहायक स्टाफ की नियुक्ति भी शीघ्र की जाए।
वित्त विभाग
विधि विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिया है। इसके अंतर्गत 53 नये न्यायिक अधिकारियों के पदों की जल्द नियुक्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार इन न्यायालयों में मुख्यतः पोक्सो अधिनियम, 2012 और बलात्कार से जुड़े मामले (आईपीसी की धारा 376/भारत न्याय संहिता की धारा 64) की सुनवाई की जाएगी। दिल्ली सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में शीघ्र सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित होने से समाज में एक सशक्त संदेश जाएगा और महिलाओं एवं बच्चों के प्रति अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगेगा।