शमेशा में रंगों का उत्सव: प्रेम और भाईचारे की अनूठी मिसाल

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शमेशा में रंगों का उत्सव: प्रेम और भाईचारे की अनूठी मिसाल

​​​​​​​हमेशा के आंगन में दिखी एकता, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास की झलक

शमेशा में रंगों का उत्सव प्रेम और भाईचारे की अनूठी मिसाल

Shamsha Aani | Chaman Sharma

चमन शर्मा 

आनी उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बखनाओ के शमेशा गांव में इस वर्ष होली का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही गांव की फिज़ाओं में रंगों की महक घुल गई थी। घर-आंगन, चौपाल और गलियां रंग-बिरंगे गुलाल से सराबोर दिखाई दे रही थीं। हर चेहरे पर मुस्कान थी और दिलों में एक-दूसरे के प्रति अपनापन साफ झलक रहा था।

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बच्चों की टोलियां जहां एक-दूसरे पर रंग डालते हुए खिलखिला रही थीं, वहीं युवा वर्ग ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नाटी में झूमता नजर आया। बुजुर्गों ने भी इस अवसर पर आशीर्वाद और शुभकामनाओं के साथ उत्सव में सहभागिता निभाई। पूरा गांव मानो एक परिवार बनकर इस रंगोत्सव में डूब गया था।

विशेष रूप से महादेव शमशरी के पावन प्रांगण में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में एकत्रित होकर पहले भगवान का स्मरण किया, तत्पश्चात एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। यह दृश्य अपने आप में अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था। ढोल की थाप, लोकगीतों की गूंज और “होली है” के उल्लासपूर्ण स्वर वातावरण को जीवंत बना रहे थे।

उत्सव के दौरान ग्रामवासियों ने आपसी मतभेदों को भुलाकर एकता, सहयोग और सद्भाव की मिसाल पेश की। कई स्थानों पर सामूहिक जलपान और पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई, जिससे आपसी मेलजोल और भी प्रगाढ़ हुआ। युवाओं ने अनुशासन और मर्यादा का विशेष ध्यान रखते हुए पर्व को शालीनता के साथ मनाया, जो समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

शमेशा गांव की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं रही, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम बनी। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर त्योहार मनाता है, तो वह केवल परंपरा का निर्वहन नहीं करता, बल्कि प्रेम, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को भी सशक्त बनाता है।

निस्संदेह, शमेशा की यह होली आने वाले वर्षों तक प्रेम, भावनाओं और सांस्कृतिक एकता की एक प्रेरणादायक स्मृति बनकर लोगों के हृदय में बसी रहेगी।

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