पिंकी कुमारी
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
विधानसभा के बाहर शिक्षा मंत्री ने भाजपा के चुनावी वादों और मौजूदा कार्यों के बीच के अंतर को उजागर किया। इटू ने कहा कि चुनाव से पहले उन्होंने यहां के लोगों को नौकरियों और उनके बैंक खातों में 10 लाख रुपये जमा करने का वादा किया था। उन्होंने हिंदू मुख्यमंत्री की बात की थी। आज उनके पास कहने को कुछ नहीं है। उनकी ये टिप्पणी क्षेत्र में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है।
मंत्री ने विपक्ष की इस मांग को जनता का ध्यान भटकाने का एक मात्र राजनीतिक हथकंडा बताया। उन्होंने सवाल किया कि अब उन्हें लगता है कि वे विधि विश्वविद्यालय की मांग करके जनता को शांत कर सकते हैं, लेकिन जनता समझदार है। विधि विश्वविद्यालय में क्या खास बात है? इसे कश्मीर, बारामूला, कुपवाड़ा या अनंतनाग में भी स्थापित किया जा सकता है। जम्मू के छात्र वहां पढ़ने जाएंगे। अब यह मुद्दा क्यों बन रहा है?” मंत्री इटू ने वैष्णो देवी कॉलेज के छात्रों से जुड़े हालिया विवाद का हवाला देते हुए भाजपा के दोहरे मापदंड को रेखांकित किया।
उन्होंने पूछा कि देखिए उन्होंने वैष्णो देवी कॉलेज के 50 छात्रों के साथ कैसा बर्ताव किया। अगर सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को उनके प्रवेश सुनिश्चित करने की गंभीरता नहीं होती तो उनके भविष्य का क्या होता? उन्होंने उन 50 छात्रों का भविष्य बर्बाद नहीं किया। अब, अगर मुस्लिम छात्र जम्मू के किसी विधि विश्वविद्यालय में पढ़ने आते हैं तो क्या उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया जाएगा? मंत्री इटू ने कहा कि जम्मू और कश्मीर एक हैं। विश्वविद्यालय कश्मीर में हो या बारामूला में, जम्मू के छात्र वहीं जाएंगे। वे समानता की बात तो करते रहते हैं। उनके कार्यों में समानता कहां है?
शिक्षा मंत्री ने उपराज्यपाल (एलजी) के सीधे अधिकार क्षेत्र में काम करने वाली कानून-व्यवस्था व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अपने अधिकारों की मांग करने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग करता है। पुलिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, वे उपराज्यपाल के अधीन हैं। वही लोगों की पिटाई करवाते हैं। लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, और उन्हें लाठियों से पीटा जा रहा है।