प्रदर्शनकारियों की मांग 'लद्दाख को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा'

प्रदर्शनकारियों की मांग 'लद्दाख को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा'

लेह में लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों...

प्रदर्शनकारियों की मांग लद्दाख को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा

ओशिका तौमर 

लोकल न्यूज़ ऑफ इंडिया

लेह में लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बुधवार को इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जब छात्रों ने बीजेपी कार्यालय और CRPF की गाड़ी में आग लगा दी। छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच भी झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्र सरकार लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करे और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। 

प्रदर्शन का कारण  

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था। शुरू में लद्दाख के लोग इस फैसले से उत्साहित थे क्योंकि उन्हें लगा कि इससे विकास होगा। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें लगा कि केंद्र सरकार की ओर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है, क्योंकि यहां सिर्फ एक लेफ्टिनेंट गवर्नर और एक सांसद हैं। लद्दाख को पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में चार विधायक मिलते थे, जो अब खत्म हो गए हैं। इसके कारण स्थानीय लोगों को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। 

संविधान की छठी अनुसूची क्या है? 

संविधान की छठी अनुसूची पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों को विशेष स्वायत्तता देती है। इसमें स्वायत्त जिले बनाए जाते हैं जिनका प्रशासन स्थानीय जनता के नियंत्रण में होता है। इन जिलों के पास भूमि, जल, कृषि, स्वास्थ्य, पुलिस जैसी कई व्यवस्थाओं पर अधिकार होता है। इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की अनुमति के बिना कुछ भी करना संभव नहीं होता, जिससे स्थानीय लोगों को अपने संसाधनों और प्रशासन पर नियंत्रण मिलता है। 

लद्दाख की मांगें  

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि लद्दाख को भी यह विशेष स्वायत्तता मिले और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। उनका तर्क है कि सिक्किम और मिजोरम जैसे छोटे राज्यों को पहले ही राज्य का दर्जा मिल चुका है, जबकि लद्दाख की आबादी और क्षेत्रफल उनसे कहीं अधिक है। साथ ही लद्दाख सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पूर्ण राज्य बनने से लद्दाख को अपनी भूमि, जल और संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा और स्थानीय लोग अपने विकास के फैसले खुद ले सकेंगे।

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