अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
देश-दुनिया के इतिहास में 01 मार्च की तारीख एक बड़े परमाणु परीक्षण के कारण दर्ज है। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद उम्मीद की गई थी कि विश्व समुदाय ऐसे हथियारों से दूरी बनाएगा। लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद भी परमाणु परीक्षणों का सिलसिला जारी रहा।
01 मार्च 1954 को अमेरिका ने प्रशांत महासागर स्थित Bikini Atoll में ‘कैसल ब्रावो’ नामक परमाणु परीक्षण किया। यह अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी परमाणु विस्फोट माना जाता है। इस परीक्षण में लगभग 15 मेगाटन (150 लाख टन टीएनटी के बराबर) शक्ति का धमाका हुआ, जो हिरोशिमा पर गिराए गए बम से कई सौ गुना अधिक शक्तिशाली था। विस्फोट इतना भीषण था कि समुद्र में करीब दो किलोमीटर चौड़ा और गहरा गड्ढा बन गया।
बिकिनी अटोल 23 छोटे-छोटे कोरल द्वीपों से मिलकर बना अंगूठी के आकार का द्वीपसमूह है, जो हवाई और फिलीपींस के बीच स्थित है। धमाके का असर लगभग 160 किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया। रेडियोधर्मी धूल आसपास के द्वीपों पर गिरी, जिससे स्थानीय आबादी, जल स्रोत और खाद्य सामग्री प्रभावित हुए। बाद में कई निवासियों को वहां से विस्थापित करना पड़ा।
1964 में अमेरिकी सरकार ने स्वीकार किया कि परीक्षण के कारण स्थानीय लोग रेडिएशन के संपर्क में आए और प्रभावितों को मुआवजा दिया गया। शीत युद्ध के दौर में परमाणु हथियारों की होड़ के प्रतीक के रूप में UNESCO ने 2010 में बिकिनी अटोल को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। इसे परमाणु युग की शुरुआत और हथियारों की प्रतिस्पर्धा का ऐतिहासिक साक्ष्य माना जाता है।