लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
लंदन, यूनाइटेड किंगडम: प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में ब्रिटिश भारतीय सेना के लिए लड़ने वाले 9,909 भारतीय सैनिकों को एक सदी से अधिक समय बाद आधिकारिक सम्मान और पहचान मिल गई है। ये सैनिक वर्षों तक आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रहे थे और उन्हें कभी औपचारिक रूप से स्मरण नहीं किया गया। अब 'पंजाब रजिस्टर्स प्रोजेक्ट' के तहत उनके नाम कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (CWGC) के आधिकारिक डेटाबेस में जोड़ दिए गए हैं।
यह उपलब्धि CWGC, UK Punjab Heritage Association और University of Greenwich की पांच वर्षीय संयुक्त शोध परियोजना का परिणाम है। शोधकर्ताओं ने लाहौर संग्रहालय में सुरक्षित लगभग 26,000 पृष्ठों के ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और गहन अध्ययन किया। इन अभिलेखों में करीब 3.2 लाख पंजाबी सैनिकों का विवरण दर्ज था। जांच के दौरान पता चला कि 15,935 मृत सैनिकों के रिकॉर्ड में से 9,909 नाम आधिकारिक स्मारक सूची से गायब थे।
कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन की महानिदेशक क्लेयर हॉर्टन ने कहा, "प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के एक सदी बाद भी हमारा मिशन जारी है कि राष्ट्रमंडल की सेवा में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति को वह सम्मान मिले जिसका वह हकदार है। पंजाब रजिस्टर्स परियोजना इस मिशन में एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इन 9,909 नामों की वापसी केवल इतिहास नहीं, बल्कि परिवारों की पहचान और युद्ध की मानवीय कीमत को स्वीकार करने का भी प्रतीक है।"
लेस्टर (ब्रिटेन) के दंत चिकित्सक डॉ. इंदर सिंह पलाहे, जिनके परदादा केसर सिंह युद्ध में शहीद हुए थे, ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अब तक हम केवल सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करते थे, लेकिन अब हमें उनके सैन्य बलिदान की सच्चाई और उनकी रेजिमेंट की जानकारी मिली है। अब उनका नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज रहेगा। इससे हमारे पूरे परिवार के त्याग को पहचान मिली है और हमारे लिए इसका बहुत बड़ा महत्व है।"
इसी तरह इंग्लैंड की पूर्व रग्बी खिलाड़ी मंजींदर नागरा ने बताया कि उन्हें यह जानकर गहरा भावनात्मक अनुभव हुआ कि उनके परनाना जगत सिंह का नाम भी अब आधिकारिक रूप से CWGC के रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा, "100 साल बाद आखिरकार उनके बलिदान को वह सम्मान और गरिमा मिली जिसकी वे हमेशा से हकदार थे। यह हमारे पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है।"
इतिहासकार अमनदीप मद्रा, जो UK Punjab Heritage Association के अध्यक्ष हैं, ने कहा कि इन सैनिकों को इसलिए भुलाया नहीं गया क्योंकि उन्होंने सेवा नहीं की थी, बल्कि एक सदी पहले लिए गए प्रशासनिक फैसले के कारण उनका बलिदान रिकॉर्ड में शामिल ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस गलती को सुधारने का अर्थ है दुनिया भर के परिवारों को उनका इतिहास वापस लौटाना और सभी सैनिकों को समान सम्मान देना।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के 14 लाख से अधिक सैनिक विभिन्न मोर्चों पर लड़े थे, जिनमें लगभग पांच लाख सैनिक तत्कालीन अविभाजित पंजाब से थे। यह नई पहल उन हजारों भारतीय सैनिकों के योगदान को वैश्विक इतिहास में उचित स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।