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POCSO मामले में 19 वर्षीय दोषी को राहत, मद्रास हाईकोर्ट ने उम्रकैद घटाकर 10 साल की

मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में 19 वर्षीय दोषी की उम्रकैद घटाकर 10 साल की सजा कर दी। अदालत ने कहा कि किशोरावस्था के हार्मोनल बदलावों के प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

By : Local News of India
POCSO मामले में 19 वर्षीय दोषी को राहत, मद्रास हाईकोर्ट ने उम्रकैद घटाकर 10 साल की

न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 
ऋचा बर्नवाल 
मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज) अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए 19 वर्षीय युवक को बड़ी राहत देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। 

न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की पीठ आरोपी द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO एक्ट, एससी/एसटी एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने के प्रयास से जुड़े प्रावधानों के तहत दोषी ठहराते हुए शेष जीवन तक कारावास की सजा सुनाई थी। 

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी अपराध के समय लगभग 19 वर्ष का था और पीड़िता को कई वर्षों से जानता था। अदालत ने माना कि दोनों के बीच पहले से परिचय और संबंध था तथा इस उम्र में होने वाले हार्मोनल बदलावों के प्रभाव को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को अत्यधिक कठोर बताते हुए उसमें संशोधन किया। 

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO कानून के तहत किसी नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है। यदि संबंध प्रेमपूर्ण या आपसी सहमति वाला प्रतीत होता हो, तब भी नाबालिग के साथ यौन संबंध कानूनन अपराध ही माना जाएगा। 

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले में POCSO अधिनियम के तहत बढ़ी हुई सजा लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार मौजूद नहीं थे। इसके बाद अदालत ने सजा की अवधि पर पुनर्विचार करते हुए उम्रकैद को घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। 

यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अदालत ने किशोरावस्था और युवावस्था में होने वाले जैविक एवं मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए सजा निर्धारण में उम्र और परिस्थितियों को महत्वपूर्ण कारक माना है, जबकि साथ ही POCSO कानून के संरक्षणात्मक उद्देश्य को भी बरकरार रखा है। 
 

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