लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर चर्चा में है। ट्रस्ट पर वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं, क्योंकि ट्रस्ट ने अपनी आय-व्यय और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में ट्रस्ट ने स्वयं को सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं माना और वित्तीय विवरण उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंची है।
मामले को लेकर विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग उठाई है। उनका कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के दान से संचालित संस्था होने के कारण ट्रस्ट को वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं ट्रस्ट का पक्ष है कि वह एक स्वतंत्र धार्मिक ट्रस्ट है और आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आता।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विपक्षी दल जहां ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि ट्रस्ट कानून के तहत कार्य कर रहा है और उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक प्रेरित हैं।
फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर बहस जारी है।