लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के एक किसान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट की जमीन पर अपने पारिवारिक स्वामित्व का दावा किया है। किसान का कहना है कि यह जमीन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रशासन द्वारा सैन्य जरूरतों के लिए अधिग्रहित की गई थी और बाद में न तो वापस की गई और न ही उचित मुआवजा दिया गया।
याचिका में किसान ने करीब 3500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि उनके पास पुराने सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि जमीन उनके पूर्वजों की थी और इसे केवल अस्थायी रूप से लिया गया था।
किसान ने यह भी दावा किया है कि पिछले कई दशकों से वह इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और विभिन्न सरकारी विभागों में दस्तावेज जुटाने में उनका भारी खर्च हुआ है।
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत इस बात की जांच करेगी कि क्या ऐतिहासिक रिकॉर्ड और दस्तावेज किसान के दावे को समर्थन देते हैं या नहीं।
इस विवाद ने एक बार फिर पुराने भूमि अधिग्रहण मामलों और उनके मुआवजे से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।