लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने और आतंकवाद का महिमामंडन करने के आरोप में प्रतिबंधित की गई 25 किताबें अब भी विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बिक रही हैं। पिछले वर्ष उपराज्यपाल प्रशासन ने इन पुस्तकों की बिक्री, वितरण और सार्वजनिक प्रसार पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद ये किताबें इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं।
प्रतिबंध का उद्देश्य उन प्रकाशनों के प्रसार को रोकना था, जिन पर युवाओं को कट्टरपंथ और अलगाववादी विचारधारा की ओर प्रभावित करने का आरोप लगाया गया था। प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर इन पुस्तकों को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया था।
हालांकि, ऑनलाइन ई-कॉमर्स और बुक सेलिंग प्लेटफॉर्म पर इन किताबों की उपलब्धता ने प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई शीर्षकों को सामान्य पुस्तकों की तरह सूचीबद्ध कर ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित सामग्री की निगरानी और प्रवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले में संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि किसी पुस्तक पर लगाए गए कानूनी प्रतिबंध को डिजिटल माध्यमों पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अधिक सख्त व्यवस्था की आवश्यकता है।