लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौत को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और वन विभाग से बाघों की मौत के मामलों में उठाए गए रोकथाम और उपचार संबंधी कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामला कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत से जुड़ा है।
याचिका में कान्हा नेशनल पार्क में हुई बाघों की मौत को लेकर चिंता जताई गई थी। आशंका जताई गई कि कुछ मौतें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण से जुड़ी हो सकती हैं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से बीमारी की रोकथाम, निगरानी और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों की जानकारी मांगी है।
अदालत ने राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया है कि वे अपनी रिपोर्ट में बाघों की मौत के कारणों, जांच प्रक्रिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों का विवरण पेश करें।
कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ समय में कई बाघों की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े लोगों ने चिंता जताई थी। अधिकारियों ने बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने के लिए आसपास के क्षेत्रों में निगरानी और आवश्यक कदम उठाने शुरू किए हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बाघों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कोर्ट की निगरानी के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार और वन विभाग की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर है।