लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की मौत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिस युवक को कुछ दिन पहले पुलिस ने ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बताकर उसके व्यवहार को समझाने की कोशिश की थी, बाद में उसी युवक की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्रवाई और एनकाउंटर की वैधता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला तब चर्चा में आया जब भरत तिवारी ने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी पर पिस्तौल तान दी थी। उस समय पुलिस ने घटना को मानसिक बीमारी से जुड़ा मामला बताया था और तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं की थी। इस घटना का वीडियो भी चर्चा में रहा।
इसके कुछ दिनों बाद पुलिस और भरत तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। परिवार का दावा है कि यह फर्जी एनकाउंटर था और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए। आरा से सांसद सुदामा प्रसाद ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य में ‘एनकाउंटर राज’ चलने का आरोप लगाया। वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार की गई थी।
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार में पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस का केंद्र बन गया है।