लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद पर अब नई कानूनी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में इस मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल (सोमवार) से शुरू होगी। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ दोपहर 2:30 बजे से सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी।
हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि बहस की शुरुआत याचिकाकर्ताओं के तर्कों से होगी, जिसके बाद विरोधी पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इस मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी उपस्थित रहे, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया।
इससे पहले न्यायालय ने 28 मार्च को भोजशाला परिसर का निरीक्षण भी किया था। यह निरीक्षण 16 मार्च की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों के तहत किया गया था।
भोजशाला को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह स्थल वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है, जहां तय नियमों के अनुसार मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति है।
एएसआई द्वारा कराए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में परिसर के ऐतिहासिक और स्थापत्य पहलुओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट में 106 स्तंभ, 32 शिलालेख और प्राचीन काल की साहित्यिक रचनाओं के प्रमाण मिले हैं। साथ ही, मस्जिद और मकबरे से जुड़े 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी पाए गए हैं, जिनमें इस्लामी परंपराओं का उल्लेख है।
दोनों पक्ष एएसआई रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी आपत्तियां अदालत में दाखिल कर चुके हैं। अब 6 अप्रैल से शुरू होने वाली नियमित सुनवाई में इन तथ्यों पर गहन बहस होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने भी हाल ही में स्पष्ट किया है कि इस विवाद का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय ही करेगा। ऐसे में अब इस मामले की दिशा और परिणाम इंदौर खंडपीठ की सुनवाई पर निर्भर करेगा।