लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
काठमांडू। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मध्यपूर्व में बढ़ते संघर्ष का नेपाल जैसे रेमिटेंस-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ‘एडीबी ब्रिफ्स 384’ के अनुसार, इस संकट से ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति शृंखलाओं में बाधा, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और रेमिटेंस प्रवाह में गिरावट का खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव सीधे तौर पर रेमिटेंस प्रवाह को प्रभावित करेगा, जिसका सबसे अधिक असर नेपाल पर पड़ सकता है। नेपाल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा विदेशों से आने वाले धन पर निर्भर है, खासकर पश्चिम एशिया में काम कर रहे नेपाली श्रमिकों की कमाई पर।
एडीबी के अनुसार, नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 8.1 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आने वाले रेमिटेंस से आता है, जो एशिया में सबसे अधिक है। ऐसे में यदि वहां आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ती हैं, तो नेपाली श्रमिकों की आय और रोजगार पर असर पड़ेगा, जिससे देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह घट सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी नेपाल के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पूरी तरह आयातित ईंधन पर निर्भर होने के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है।
यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो एडीबी का अनुमान है कि एशिया के विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि दर में 1.3 प्रतिशत अंक तक गिरावट आ सकती है, जबकि मुद्रास्फीति 3.2 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। दक्षिण एशिया में महंगाई पर इसका असर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है, जहां कीमतों में 4.9 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम एशिया उर्वरकों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। संघर्ष के कारण कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से यूरिया और अमोनिया के निर्यात में बाधा आई है, जिससे वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में तेज उछाल आया है। 27 फरवरी से 13 मार्च के बीच यूरिया की कीमत में 42.9 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे नेपाल जैसे कृषि प्रधान देश में खेती की लागत बढ़ने की संभावना है।
इसके अलावा, ओमान और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों में व्यवधान के कारण ढुलाई और बीमा लागत में भी वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर आयात-निर्भर देशों में वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
एडीबी ने इस संकट से निपटने के लिए सुझाव दिया है कि सरकारें ऊर्जा सब्सिडी को केवल जरूरतमंद वर्गों तक सीमित करें, ऊर्जा की खपत कम करें और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दें। साथ ही, संभावित रेमिटेंस गिरावट को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार के सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि मध्यपूर्व का यह संघर्ष लंबा चलता है, तो नेपाल जैसे देशों की आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर भी इसका प्रभाव गहरा हो सकता है।