गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Rashtriya Swayamsevak Sangh यानी RSS को लंबे समय से Bharatiya Janata Party का वैचारिक और संगठनात्मक आधार माना जाता है। पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संघ की भूमिका को लेकर हो रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में RSS के मजबूत बूथ नेटवर्क, घर-घर संपर्क अभियान और कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने बीजेपी को बड़ा फायदा पहुंचाया। चुनाव प्रचार के दौरान संघ से जुड़े कई संगठनों ने गांवों और शहरी इलाकों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बंगाल में बीजेपी ने सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि माइक्रो-मैनेजमेंट और कैडर आधारित रणनीति पर भी जोर दिया। RSS के स्वयंसेवकों ने मतदान के दिन बूथ मैनेजमेंट, वोटर आउटरीच और संगठनात्मक समन्वय में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति हुई, जबकि बीजेपी इसे “संगठन की मेहनत और जनता के समर्थन” की जीत बता रही है।
अब बंगाल की नई राजनीतिक तस्वीर में RSS और बीजेपी के रिश्तों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।