गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की तिरोभाव तिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। असम में इस अवसर को क्षेत्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है और राज्यभर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
15वीं-16वीं शताब्दी के महान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव का जन्म करीब 1449 में हुआ था। उन्होंने एकशरण नाम धर्म की स्थापना की और भक्ति के साथ सामाजिक समानता, समरसता तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दिया।
शंकरदेव ने असम की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने नामघर और सत्र जैसी संस्थाओं को विकसित किया तथा बोरगीत, अंकिया नाट और सत्रिया नृत्य जैसी परंपराओं को समृद्ध किया। उनकी शिक्षाओं में भक्ति के साथ सामाजिक समावेश और निस्वार्थ सेवा को विशेष महत्व दिया गया।
तिरोभाव तिथि के अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रमों में भाग लिया। धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शंकरदेव की विरासत और उनके विचारों को याद किया गया।
मंत्री पीयूष हजारिका समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों से नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी शंकरदेव को श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि उनके समावेशी विचार, सामाजिक समानता और निस्वार्थ सेवा की भावना आज भी असम को शांति, सद्भाव और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
शंकरदेव की विरासत को असम की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, जो पीढ़ियों से राज्य के लोगों को जोड़ती रही है।
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
अमित कुमार पांडेय