गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor को लेकर बड़ा दावा किया है। रिजिजू ने कहा कि थरूर ने खुद स्वीकार किया था कि कांग्रेस महिलाओं के मुद्दे पर सही स्थिति में नहीं है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका, लेकिन इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस का रुख महिलाओं के हित में नहीं था। उन्होंने दावा किया कि थरूर ने एक तरह से यह मान लिया था कि कांग्रेस “एंटी-वुमन” यानी महिलाओं के खिलाफ दिख रही है।
रिजिजू ने ANI से बातचीत में कहा कि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में यह संकेत दिया था कि भले ही लोग कांग्रेस को महिलाओं के खिलाफ मानें, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। इसी बयान को आधार बनाते हुए रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला तेज किया।
उन्होंने कहा, “कौन सोच सकता है कि कोई महिलाओं के खिलाफ वोट करेगा? महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, यह सबकी जिम्मेदारी है।” रिजिजू ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को उलझाया।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे परिसीमन (delimitation) से जोड़ने का विरोध कर रही है। शशि थरूर ने भी कहा था कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग किया जाना चाहिए, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके।
इस बयानबाज़ी ने एक बार फिर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को तेज कर दिया है। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों दल अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 के चुनावी नैरेटिव को भी प्रभावित कर सकता है, जहां “नारी शक्ति” एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।