गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर दोनों देशों के बदले रुख ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रूट्स में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर नाकेबंदी या सैन्य दबाव बढ़ाता है, तो यह केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है। अमेरिका ने भी खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे टकराव की आशंका और तेज हो गई है।
हाल के दिनों में दोनों देशों के नेताओं और सैन्य अधिकारियों की ओर से दिए गए तीखे और भड़काऊ बयान हालात को और अस्थिर बना रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। वहीं अमेरिका ने क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोगी देशों की रक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी प्रकार की नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल, शेयर बाजार में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत सहित कई एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी इससे प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़े और बयानबाजी बढ़ती रही, तो यह टकराव “वॉर के सेकंड फ्रंट” के रूप में सामने आ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर टिकी हुई है, जहां एक छोटी चिंगारी भी बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।