लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और संस्थाओं के लिए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों में संशोधन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए बदलावों के तहत विदेशी फंड लेने वाली संस्थाओं की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
संशोधित नियमों के मुताबिक, NGOs को विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए अपने उद्देश्य और काम के क्षेत्र का चयन एक निर्धारित सूची में से करना होगा। इसमें सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी कई श्रेणियां शामिल हैं।
नए नियमों में धार्मिक गतिविधियों के लिए भी कुछ प्रावधान रखे गए हैं, लेकिन कई श्रेणियों में धर्म परिवर्तन (proselytisation) से जुड़ी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि FCRA के तहत मिलने वाले विदेशी योगदान के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि जिन संस्थाओं के प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के अलावा अन्य विदेशी नागरिक पदाधिकारी होंगे, उन्हें आमतौर पर FCRA के तहत पंजीकरण या विदेशी फंड लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि, संशोधित नियमों में यह प्रावधान भी रखा गया है कि केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में आदेश जारी कर ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों को संस्था के प्रमुख पदों पर अनुमति दे सकती है।
सरकार ने FCRA नियम, 2011 में कई बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य NGOs और अन्य संगठनों द्वारा विदेशी धन के प्राप्ति और इस्तेमाल की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाना है।