लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को वापस लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया ने तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी तीन प्राचीन कलाकृतियों को भारत लौटाने की घोषणा की है। इन धरोहरों में 11वीं सदी की चोल कालीन भद्रकाली देवी का कांस्य त्रिशूल, 11वीं-12वीं सदी की ग्रेनाइट नंदी प्रतिमा और 12वीं सदी की छह मुख वाले कार्तिकेय की बेसाल्ट मूर्ति शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, भद्रकाली त्रिशूल और नंदी प्रतिमा का संबंध तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के कोल्लुमांगुडी स्थित श्री कासिविश्वनाथस्वामी मंदिर से माना जाता है। वहीं, कार्तिकेय की मूर्ति तंजावुर जिले के मनंबाडी गांव स्थित नागनाथ स्वामी मंदिर से जुड़ी बताई गई है।
इन प्राचीन वस्तुओं की वापसी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत की जा रही है। तमिलनाडु की आइडल विंग CID ने जांच में पाया कि इन कलाकृतियों को अवैध तरीके से हटाकर विदेशों में पहुंचाया गया था।
पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस सुसान क्रेनन AC द्वारा किए गए प्रोवेनेंस रिव्यू में भी इन वस्तुओं के स्वामित्व इतिहास में कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि दो मूर्तियों के भारत से कानूनी निर्यात का प्रमाण स्थापित नहीं हो सका।
तमिलनाडु का चोल कालीन मंदिर कला और कांस्य मूर्तिकला में विशेष स्थान रहा है। 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच चोल साम्राज्य ने दक्षिण भारत में धार्मिक कला, धातु शिल्प और मंदिर परंपराओं को नई ऊंचाई दी। चोल कांस्य प्रतिमाएं अपनी उत्कृष्ट कारीगरी और धार्मिक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।