लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Pankaj Tripathi ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि गांव से शहर आने के बाद उन्हें कई तरह के जजमेंट का सामना करना पड़ा। अभिनेता ने कहा कि अंग्रेजी न बोल पाने की वजह से लोग उन्हें गरीब और कम पढ़ा-लिखा समझते थे।
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बिहार के गांव से दिल्ली आने के बाद उनके लिए माहौल पूरी तरह अलग था। भाषा, रहन-सहन और लोगों के व्यवहार में बड़ा फर्क था। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजी बोलना “स्टेटस सिंबल” माना जाता था और जो लोग अंग्रेजी नहीं बोल पाते थे, उन्हें अलग नजर से देखा जाता था।
अभिनेता के मुताबिक शुरुआत में उन्हें काफी असहज महसूस होता था। कई बार लोग उनके पहनावे और बोलचाल से ही धारणा बना लेते थे। हालांकि उन्होंने धीरे-धीरे खुद को उस माहौल में ढाला और अभिनय पर पूरा फोकस रखा।
पंकज त्रिपाठी ने कहा कि गांव की सादगी और संघर्ष ने उन्हें जिंदगी को समझने में मदद की। यही वजह है कि आज भी वह खुद को जमीन से जुड़ा इंसान मानते हैं।
आज पंकज त्रिपाठी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और दमदार कलाकारों में गिने जाते हैं। Mirzapur में “कालीन भैया” के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों और वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीता है।
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है। कई लोग इसे छोटे शहरों और गांवों से आने वाले युवाओं के संघर्ष से जोड़कर देख रहे हैं।