लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
चंडीगढ़।
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को दबाने के बजाय उनका ईमानदारी से सामना किया जाना चाहिए।
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब के लोगों को अपने अतीत के कठिन दौर का सामना करने और उससे सीखने का अधिकार है। उन्होंने फिल्म को हटाने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे इतिहास नहीं बदला जा सकता। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने भी पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया।
यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया। फिल्म कई वर्षों तक सेंसर संबंधी विवादों में फंसी रही और हाल ही में OTT पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण फिल्म फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी और इसे वापस लाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
फिल्म हटाए जाने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि ऐसा हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और संवेदनशील ऐतिहासिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।