लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
मुंबई: निर्देशक इम्तियाज़ अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' अपनी भावनात्मक कहानी और संवेदनशील प्रस्तुति के कारण दर्शकों का दिल जीत रही है। फिल्म विभाजन की त्रासदी को नफरत के बजाय प्रेम, यादों और इंसानियत के नजरिए से दिखाती है।
फिल्म की कहानी भारत में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिसकी भूमिका नसीरुद्दीन शाह ने निभाई है, के इर्द-गिर्द घूमती है। उसकी अंतिम इच्छा पाकिस्तान स्थित अपने पुश्तैनी घर लौटने और अपने पुराने प्रेम से एक बार फिर मिलने की है। इसी यात्रा के साथ उसकी युवावस्था की प्रेम कहानी भी सामने आती है, जिसकी शुरुआत भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर में हुई थी।
'मैं वापस आऊंगा' में विभाजन की पीड़ा को दिखाया गया है, लेकिन इसे नफरत फैलाने का माध्यम नहीं बनाया गया। फिल्म इतिहास के दर्द के बीच बची हुई इंसानियत, रिश्तों और प्रेम की भावनाओं को सामने लाने का प्रयास करती है।
दर्शकों और समीक्षकों के अनुसार, फिल्म का असर इसके समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक महसूस होता है। यही कारण है कि सकारात्मक प्रतिक्रिया और दर्शकों की सिफारिशों के दम पर फिल्म लगातार चर्चा में बनी हुई है।