लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
ब्रिटेन की एक महिला की 20 साल पुरानी शादी उस समय संकट में पड़ गई, जब उसे पता चला कि उसका पति उसकी जानकारी के बिना वर्षों से निजी तौर पर स्पर्म डोनेट कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, वह क्लीनिक के बजाय सीधे महिलाओं से संपर्क करता था और गुमनाम स्पर्म डोनर के रूप में कई बच्चों का जैविक पिता बन चुका था।
महिला को शुरुआत में लगा कि उसका पति जरूरतमंद लोगों की मदद के उद्देश्य से ऐसा कर रहा होगा, लेकिन बाद में सामने आया कि वह गर्भधारण की प्रक्रिया का हिस्सा बनने और गर्भवती महिलाओं के संपर्क में रहने को लेकर मानसिक रूप से आकर्षित था। रिपोर्ट के अनुसार, वह गर्भवती महिलाओं को देखने और पूरी प्रक्रिया में शामिल रहने की इच्छा रखता था।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक डोनर समूह से जुड़ी महिला का संदेश गलती से आरोपी की पत्नी तक पहुंच गया। इसके बाद पत्नी ने पति के फोन और लैपटॉप की जांच की, जहां उसे महिलाओं के साथ हुई बातचीत और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड मिले। इसी से उसकी दोहरी जिंदगी का पता चला।
रिपोर्ट के अनुसार, निजी और अनियमित तरीके से स्पर्म डोनेशन स्वास्थ्य और कानूनी दृष्टि से कई जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ ऐसे मामलों में केवल अधिकृत और नियामक संस्थाओं से जुड़े फर्टिलिटी सेंटर के माध्यम से ही स्पर्म डोनेशन कराने की सलाह देते हैं।
घटना के बाद महिला ने तलाक की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अन्य महिलाओं को भी ऐसे अनियमित "फ्री डोनर्स" से सावधान रहने की अपील की है।