लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
जलेबी आज भारत की सबसे लोकप्रिय पारंपरिक मिठाइयों में गिनी जाती है। त्योहारों, शादियों और खास अवसरों पर इसकी मिठास हर घर तक पहुंचती है। हालांकि, इतिहासकारों के अनुसार जलेबी की उत्पत्ति भारत में नहीं, बल्कि प्राचीन फारस (वर्तमान ईरान) में हुई थी। वहां इसे 'जुलबिया' (Zulbiya/Zoolbia) के नाम से जाना जाता था।
इतिहास से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि 10वीं शताब्दी की अरबी और फारसी पाक पुस्तकों में जुलबिया का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि फारसी और तुर्क व्यापारी तथा कारीगर इस मिठाई को भारतीय उपमहाद्वीप लेकर आए, जहां समय के साथ इसका स्वाद, बनाने का तरीका और नाम बदलकर 'जलेबी' हो गया।
भारत में 15वीं शताब्दी के जैन ग्रंथ 'प्रियंकर-नृप-कथा' में जलेबी का उल्लेख मिलता है। बाद के संस्कृत ग्रंथों में भी इसकी सामग्री और बनाने की विधि का वर्णन मिलता है, जो आधुनिक जलेबी से काफी मिलती-जुलती है। धीरे-धीरे यह मिठाई भारतीय खानपान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गई।
आज जलेबी की कई क्षेत्रीय किस्में प्रचलित हैं। कहीं इसे रबड़ी के साथ परोसा जाता है तो कहीं दही, दूध या फाफड़ा के साथ खाने की परंपरा है। उत्तर भारत से लेकर बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक जलेबी ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
भले ही इसकी शुरुआत फारस में हुई हो, लेकिन भारत में जलेबी ने जो लोकप्रियता हासिल की है, उसने इसे देश की सबसे पसंदीदा पारंपरिक मिठाइयों में शामिल कर दिया है।