गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई को लेकर सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मस्जिद के कुछ हिस्से को हटाने की योजना का स्थानीय मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग की ओर से विरोध किया जा रहा है। विरोध के दौरान पुलिस पर पथराव की खबर सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
रविवार रात से जुटने लगी थी भीड़
रिपोर्ट के मुताबिक, शाही मस्जिद के हिस्से को हटाए जाने की खबर के बाद पिछले दो दिनों से बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जुट रहे थे। रविवार रात भारी पुलिस बल के साथ जेसीबी और पोकलैंड मशीनें इलाके में पहुंचीं, जिसके बाद विरोध और नारेबाजी हुई।
प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया और मस्जिद के आसपास बैरिकेडिंग की।
सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है मामला
यह विवाद सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से जुड़े सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट से संबंधित है। प्रशासन की योजना कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की है।
आधिकारिक योजना के दायरे में कई धार्मिक स्थल आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर स्थानों को आपसी सहमति से हटाया जा चुका है, जबकि शाही मस्जिद समेत कुछ स्थानों को लेकर विवाद बना हुआ है।
समुदाय के भीतर भी अलग-अलग रुख
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मुस्लिम समुदाय के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई है। एक पक्ष मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए सहमति की बात कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कार्रवाई का विरोध कर रहा है और मस्जिद को सड़क चौड़ीकरण से बाहर रखने की मांग कर रहा है।
हाईकोर्ट में सुनवाई
मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। शाही मस्जिद से जुड़े पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है और सोमवार को इस मामले पर सुनवाई होनी है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रशासन ने फिलहाल बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश की है और तत्काल कार्रवाई को लेकर स्थिति अदालत की सुनवाई से भी जुड़ी हुई है।
प्रशासन की क्या तैयारी?
तनाव को देखते हुए मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। करीब 500 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर आवाजाही सीमित की गई है। प्रशासन का प्रयास है कि स्थिति को नियंत्रण में रखा जाए और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
फिलहाल शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, स्थानीय विरोध और हाईकोर्ट की सुनवाई—तीनों पर नजर बनी हुई है। अदालत की सुनवाई के बाद आगे की स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।