लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें भारत और ऑस्ट्रिया के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। इस बैठक में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार, हरित तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में रक्षा, तकनीक, व्यापार और काउंटर-टेररिज्म सहित 15 ठोस परिणाम सामने आए। दोनों देशों ने हाई-टेक्नोलॉजी सहयोग को अपनी साझेदारी का प्रमुख आधार माना।
बैठक के बाद दोनों देशों के बीच छह महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) और लेटर ऑफ इंटेंट का आदान-प्रदान किया गया। इनमें ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन, फूड सेफ्टी, निवेश के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म और रक्षा सहयोग को मजबूत करने जैसे क्षेत्र शामिल हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र पीसकीपिंग से जुड़े संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
दोनों देशों ने 2026 में वियना में संयुक्त स्पेस इंडस्ट्री सेमिनार आयोजित करने और वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की, जिससे युवाओं और पेशेवरों के बीच संपर्क बढ़ेगा।
वार्ता के दौरान आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दोनों नेताओं ने क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म की निंदा की और इससे निपटने के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई। यह समूह सूचना साझा करने और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने में सहयोग करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशकों में किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर का यह पहला भारत दौरा है। वहीं चांसलर स्टॉकर ने इसे दोनों देशों की 75 वर्षों पुरानी मित्रता को नई दिशा देने वाला कदम बताया।
दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की और माना कि इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।