गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भारत के एक प्रमुख खाड़ी मित्र देश ने ऊर्जा और व्यापार जगत में बड़ा संकेत दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह देश अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
होर्मुज वह रणनीतिक समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। लेकिन इस क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा चिंताओं के चलते कई देश अब “बायपास रूट” की ओर ध्यान दे रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित नए मार्ग और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए तेल को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे शिपिंग जोखिम और समय दोनों में कमी आएगी। इस कदम को ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो वैश्विक तेल बाजार पर इसका गहरा असर पड़ेगा और होर्मुज पर निर्भरता काफी हद तक घट सकती है।
भारत के लिए भी यह विकास रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिर आपूर्ति दोनों पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।