JAXA का रीयूजेबल रॉकेट टेस्ट

जापान की JAXA ने किया रीयूजेबल रॉकेट RV-X का पहला टेस्ट, हवा में उड़कर सुरक्षित लैंड हुआ

जापान की स्पेस एजेंसी JAXA ने RV-X रीयूजेबल रॉकेट का पहला परीक्षण किया। रॉकेट ने उड़ान भरने, हवा में स्थिर रहने, आगे बढ़ने और सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता दिखाई।

By : Local News of India

जापान की JAXA का RV-X रीयूजेबल रॉकेट टेस्ट फ्लाइट के दौरान उड़ान भरता हुआ, भविष्य की कम लागत वाली अंतरिक्ष तकनीक का प्रतीकात्मक दृश्य।

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 
शालू कुमारी 

टोक्यो। अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में जापान ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने 11 जुलाई 2026 को अपने प्रयोगात्मक रीयूजेबल रॉकेट Reusable Vehicle eXperiment (RV-X) का पहला टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक पूरा किया।

यह परीक्षण जापान के अकिता प्रीफेक्चर स्थित नोशिरो टेस्टिंग सेंटर में किया गया। एक मिनट से भी कम समय की इस उड़ान में RV-X ने उड़ान भरने, हवा में कुछ देर स्थिर रहने, क्षैतिज दिशा में आगे बढ़ने और सुरक्षित रूप से वापस लैंड करने की क्षमता दिखाई।

रीयूजेबल रॉकेट तकनीक की ओर बड़ा कदम

रीयूजेबल रॉकेट ऐसे लॉन्च व्हीकल होते हैं जिन्हें अंतरिक्ष मिशन के बाद वापस धरती पर लाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अंतरिक्ष अभियानों की लागत को कम करने में मदद मिलती है।

RV-X का व्यास करीब 1.8 मीटर और लंबाई 7.3 मीटर है। इसमें ज्यादा टिकाऊ इंजन लगाया गया है, जो बार-बार इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा है। रॉकेट में वर्टिकल लैंडिंग के लिए चार शॉक-एब्जॉर्प्शन लैंडिंग गियर भी लगाए गए हैं।

टेस्ट फ्लाइट में क्या हुआ?

परीक्षण के दौरान RV-X करीब 11 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और लगभग 16 मीटर तक क्षैतिज दिशा में आगे बढ़ा। इस दौरान रॉकेट अपनी सीधी स्थिति में बना रहा और सफलतापूर्वक वापस जमीन पर उतरा।

इस परीक्षण में उड़ान, होवरिंग, दिशा परिवर्तन और लैंडिंग जैसी कई तकनीकों को एक साथ जांचा गया। RV-X को JAXA और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने मिलकर विकसित किया है।

2030 तक रीयूजेबल रॉकेट का लक्ष्य

RV-X का विकास वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। इसके इंजन पर अब तक 160 से ज्यादा दहन परीक्षण किए जा चुके हैं। JAXA का लक्ष्य 2030 के शुरुआती वर्षों तक कम लागत वाले रीयूजेबल रॉकेट विकसित करना है।

भविष्य में जापान इन रीयूजेबल रॉकेटों को अपने मुख्य लॉन्च व्हीकल H3 रॉकेट की जगह इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। यह तकनीक अंतरिक्ष अभियानों को ज्यादा किफायती और लगातार जारी रखने में मदद कर सकती है।

संबंधित सामग्री

कर्नाटक के चामराजनगर में मिला थोरियम भंडार, GSI ने 700 एकड़ क्षेत्र में खनिज की पहचान की

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने कर्नाटक के चामराजनगर में थोरियम युक्त खनिज भंडार की पहचान की है। करीब 700 एकड़ क्षेत्र में मिले इस खनिज की आगे खुदाई और नीलामी की तैयारी होगी।

ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट किया, LVM3-M7 मिशन के लिए बढ़ा कदम

ISRO ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह इंजन LVM3-M7 मिशन के ऊपरी चरण में इस्तेमाल होगा।

Gaganyaan मिशन के लिए ISRO ने किया IMAT-05 पैराशूट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा

ISRO ने गगनयान मिशन के लिए IMAT-05 पैराशूट परीक्षण किया। इसमें क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग के लिए मुख्य पैराशूट प्रणाली की क्षमता का परीक्षण किया गया।

अडानी डिफेंस का बड़ा ऐलान, मध्य प्रदेश में ₹2,500 करोड़ का मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा

अडानी डिफेंस का बड़ा ऐलान, मध्य प्रदेश में ₹2,500 करोड़ का मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा

अडानी डिफेन्स & एयरोस्पेस ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ के मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स की घोषणा की है। इससे रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी।

जापान के Hayabusa2 ने टोरिफ्यून क्षुद्रग्रह के पास से सफल उड़ान भरी, अंतरिक्ष अनुसंधान को मिली नई जानकारी

जापान के Hayabusa2 अंतरिक्ष यान ने टोरिफ्यून क्षुद्रग्रह के बेहद करीब से सफल उड़ान भरी। इस मिशन से क्षुद्रग्रहों के अध्ययन और ग्रह रक्षा तकनीक को नई दिशा मिलेगी।