लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
नीति आयोग (NITI Aayog) ने एक महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज जारी करते हुए “Strategic Roadmap for Making Ayurveda Global” प्रस्तुत किया है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में एक मजबूत, वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित (evidence-based) चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करना है।
रिपोर्ट में आयुर्वेद के वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए चरणबद्ध रणनीति (phased roadmap) तैयार की गई है। इसमें गुणवत्ता मानकों, रिसर्च, क्लिनिकल वैलिडेशन, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और ग्लोबल सहयोग को मुख्य आधार बताया गया है।
नीति आयोग के अनुसार, भारत के पारंपरिक चिकित्सा तंत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए जरूरी है कि आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के साथ जोड़ा जाए। इससे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की भूमिका मजबूत होगी, बल्कि मेडिकल टूरिज्म और आयुष सेक्टर के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP), डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ाना जरूरी होगा। इसके साथ ही प्रशिक्षित मानव संसाधन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
यह रोडमैप भारत के “Viksit Bharat @2047” विज़न से भी जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें देश को वैश्विक नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है।