लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा है कि एक प्रभावी हेल्पलाइन व्यवस्था बंधुआ मजदूरी के शिकार लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे मामलों में सतर्क रहने और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी अक्सर समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में पीड़ितों तक समय पर पहुंचना, उन्हें सुरक्षित निकालना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करना बेहद जरूरी है। हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था शिकायतों के शीघ्र पंजीकरण और संबंधित प्रशासन तक सूचना पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एनएचआरसी अध्यक्ष ने यह टिप्पणी हरियाणा के विभिन्न ईंट-भट्ठों में कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान की। आयोग इन मामलों में राज्य सरकार, श्रम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई, बंधुआ मजदूरों की पहचान, रिहाई, पुनर्वास और ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण जैसे पहलुओं की भी समीक्षा कर रहा है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल पीड़ितों को मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि बंधुआ मजदूरी जैसी प्रथाओं के उन्मूलन के लिए प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस और स्थानीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय तथा शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।