लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
मुंबई में पिछले दो महीनों के दौरान कमजोर और जर्जर पेड़ों के गिरने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने शहर में पेड़ों की निगरानी, समय पर छंटाई और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालिया घटना में एक पेड़ गिरने से 11 वर्षीय बच्चे की जान चली गई। इससे पहले भी एक अन्य बच्चे की इसी तरह की दुर्घटना में मौत हुई थी। दोनों घटनाओं ने मानसून के दौरान खतरनाक पेड़ों की पहचान और उनके रखरखाव की व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई इलाकों में पुराने और कमजोर पेड़ों की समय पर जांच और छंटाई नहीं होने से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि शहरभर में संभावित रूप से खतरनाक पेड़ों का सर्वेक्षण और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, वैज्ञानिक मूल्यांकन और समय पर रखरखाव से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। मानसून के मौसम में तेज बारिश और तेज हवाओं के कारण कमजोर पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
इन घटनाओं के बाद नागरिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जोखिम वाले पेड़ों की सूची सार्वजनिक की जाए और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाया जाए।