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खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, बारिश से घटा रकबा अंतर; किसानों को राहत की उम्मीद

देश में खरीफ फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ी है। बेहतर मानसून से रकबा अंतर घटकर 20.8% रह गया है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले बुवाई अब भी कम है।

By : Local News of India

देशभर में सक्रिय मानसून के बीच खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में कुल रकबा अब भी कम बना हुआ है।

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 
ऋचा बर्नवाल 

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने लगी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 4.43 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पिछले सप्ताह के मुकाबले बुवाई में सुधार हुआ है और रकबा अंतर घटकर 20.8% रह गया है, जो एक सप्ताह पहले 22.7% था।

हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब भी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई कम है। धान का रकबा लगभग 13% घटकर 60 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं तिलहन फसलों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है, जहां बुवाई करीब 40% कम रही। देश की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई भी लगभग 40% घटकर 48 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। दालों की बुवाई में भी करीब 22% की कमी दर्ज की गई है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन फसलों में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है, वहां बुवाई पर कम असर पड़ा है। इसके विपरीत वर्षा आधारित फसलें, जैसे सोयाबीन और दालें, मानसून की देरी और असमान बारिश से अधिक प्रभावित हुई हैं। यही कारण है कि इन फसलों के रकबे में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट देखने को मिली है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले पांच दिनों के दौरान प्रमुख कृषि क्षेत्रों में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के शेष दिनों में सामान्य और समान रूप से वर्षा होती रही तो खरीफ बुवाई में तेजी आएगी और वर्तमान रकबा अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।

खरीफ सीजन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का बड़ा हिस्सा इसी मौसम पर निर्भर करता है। ऐसे में किसान अब मानसून की निरंतर सक्रियता की उम्मीद लगाए हुए हैं, ताकि समय पर बुवाई पूरी हो सके और इस वर्ष बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

 

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