लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
पेप्सिको की पूर्व सीईओ Indra Nooyi के हालिया बयान ने एक बार फिर भारत की व्यवस्था और सामाजिक संरचना पर बहस छेड़ दी है। एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत की सड़कें और यहां की “अव्यवस्था” विदेशी यात्रियों के लिए समझना आसान नहीं होता, और सड़कों पर गायों का दिखाई देना भी कई बार बाहर से आने वालों को चौंका देता है।
उनके मुताबिक, भारत की विविधता और अनियोजित दिखने वाली व्यवस्था को समझने में समय लगता है, जबकि यह देश की वास्तविकता और संस्कृति का हिस्सा भी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की तुलना में कुछ अन्य देश अधिक “संगठित” अनुभव देते हैं, जिससे वहां काम करना या घूमना अपेक्षाकृत आसान लगता है।
इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक वर्ग इसे भारत की वास्तविक चुनौतियों पर ईमानदार टिप्पणी बता रहा है, जबकि दूसरा इसे देश की छवि को नकारात्मक रूप में पेश करने वाला बयान मान रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयानों के बाद अक्सर “विकास बनाम व्यवस्था” और “संस्कृति बनाम अव्यवस्था” जैसी बहसें तेज हो जाती हैं, खासकर जब किसी वैश्विक कॉर्पोरेट लीडर की ओर से टिप्पणी आती है।
फिलहाल यह मुद्दा ऑनलाइन चर्चा में बना हुआ है और लोग अपने-अपने अनुभवों के आधार पर इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।