लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
गुजरात सरकार ने वर्ष 2026 में बिजली ट्रांसमिशन टावरों और ओवरहेड लाइनों के लिए भूमि मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव किया है। यह नई नीति उन किसानों पर लागू होगी जिनकी जमीन ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में उपयोग की जाती है।
नई व्यवस्था के तहत पहले लागू jantri-based प्रणाली को खत्म कर दिया गया है। अब किसानों को उनकी जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। यह नीति उन परियोजनाओं पर भी लागू होगी जो अभी निर्माणाधीन हैं।
सरकार ने मुआवजा तय करने के लिए एक Market Rate Committee गठित की है। इसमें जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, किसान-नामित बाजार मूल्यांकक और ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
नई नीति के अनुसार Right of Way (RoW) यानी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए उपयोग होने वाले कॉरिडोर के लिए मुआवजा भी समिति द्वारा तय बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को 30%, नगरपालिका क्षेत्रों में 45% और नगर निगम क्षेत्रों में 60% तक मुआवजा मिलेगा।
इसके अलावा टावर बेस एरिया के लिए मुआवजा क्षेत्र को भी बढ़ा दिया गया है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। 765 kV ट्रांसमिशन लाइनों के लिए यह क्षेत्र 625 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 729 वर्ग मीटर कर दिया गया है।
पहले की तीन-स्तरीय भुगतान प्रणाली को समाप्त कर अब 100% मुआवजा काम शुरू होने से पहले ही दिया जाएगा। यह कदम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।