गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर नई चिंता सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर, 130 डॉलर और यहां तक कि 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इन आंकड़ों ने भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है।
विशेष रूप से ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर संभावित नाकेबंदी की आशंका ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम तेल सप्लाई रूट माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा सीधे सप्लाई चेन और कीमतों पर असर डाल सकती है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल पर निर्भर करता है, ऐसे हालात में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतें 110 डॉलर के ऊपर स्थिर होती हैं, तो सरकार को ईंधन पर टैक्स नीति और सब्सिडी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। वहीं 130 से 150 डॉलर की स्थिति वैश्विक मंदी, शेयर बाजार में गिरावट और व्यापारिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।
सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल बाजार में सतर्कता बढ़ गई है और निवेशक भी संभावित संकट को लेकर अलर्ट मोड में हैं। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति यह तय करेगी कि तेल की कीमतें कितनी ऊंचाई तक जाती हैं।