लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
कॉर्पोरेट दुनिया से जुड़ी एक वायरल कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। एक पूर्व कर्मचारी ने दावा किया कि जिस कंपनी ने उसे बिना चेतावनी नौकरी से निकाल दिया था, वही अब छह महीने बाद उससे मदद मांग रही है।
पोस्ट के मुताबिक, कर्मचारी को अचानक नौकरी से हटा दिया गया था। उस समय कंपनी ने तुरंत सिस्टम एक्सेस बंद कर दिया और कोई खास ट्रांजिशन प्रक्रिया भी नहीं अपनाई। कर्मचारी ने लिखा कि उस फैसले से वह हैरान जरूर हुआ, लेकिन उसने आगे बढ़ने का फैसला किया।
अब करीब छह महीने बाद कंपनी ने उससे संपर्क किया और पुराने डेटा व सिस्टम से जुड़ी जानकारी मांगी। कर्मचारी के अनुसार, कंपनी को कुछ जरूरी फाइल्स और तकनीकी जानकारी की जरूरत थी, जो उसके पास थी या जिसे वही बेहतर समझता था।
सोशल मीडिया पोस्ट में कर्मचारी ने लिखा, “मैं हंस पड़ा… जिस कंपनी ने मुझे अचानक बाहर कर दिया था, वही अब मदद मांग रही है।” इसके बाद यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी।
कई यूजर्स ने कॉर्पोरेट कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी संगठन को कर्मचारियों के साथ प्रोफेशनल और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि नॉलेज ट्रांसफर और डॉक्यूमेंटेशन की कमी कई कंपनियों में बड़ी समस्या होती है।
वर्कप्लेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अचानक छंटनी या बिना हैंडओवर प्रक्रिया के कर्मचारियों को हटाना लंबे समय में कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। खासकर टेक और डेटा आधारित कामों में संस्थागत जानकारी बेहद अहम होती है।
यह मामला अब सोशल मीडिया पर “कॉर्पोरेट कर्मा” और “वर्कप्लेस कल्चर” जैसी बहसों का हिस्सा बन गया है।