गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भारत समेत कई देशों में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की खबरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन चीन में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है गाओकाओ परीक्षा की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था। चीन में विश्वविद्यालय प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा हर साल करीब 1.34 करोड़ छात्रों द्वारा दी जाती है।
परीक्षा प्रश्नपत्रों की छपाई अत्यधिक सुरक्षित स्थानों पर की जाती है। कई रिपोर्टों के अनुसार प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा जाता है। प्रश्नपत्रों की ढुलाई जीपीएस ट्रैकिंग, सील बंद कंटेनरों और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में होती है।
परीक्षा केंद्रों पर फेस रिकग्निशन, मेटल डिटेक्टर, जैमर और AI आधारित निगरानी का इस्तेमाल किया जाता है। कई क्षेत्रों में ड्रोन तक तैनात किए जाते हैं ताकि किसी भी तरह की नकल या अनियमितता को रोका जा सके। पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ चीन में कड़ी कानूनी कार्रवाई और जेल तक की सजा का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, सख्त कानून और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के संयोजन ने चीन की परीक्षा प्रणाली को दुनिया की सबसे सुरक्षित व्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है।