गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के हालिया बयानों ने सियासी गलियारों में नए कयासों को जन्म दे दिया है।
दरअसल, ब्रजभूषण ने इशारों-इशारों में पार्टी के प्रति नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर उन्हें “बोझ” समझा जा रहा है तो साफ बता दिया जाए। इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या वे बीजेपी में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
इसी बीच Akhilesh Yadav का उनके प्रति नरम रुख भी चर्चा में है। अखिलेश ने उन्हें “गोंडा का नेता” बताते हुए सीधे तौर पर कोई विरोध नहीं किया, जिससे सियासी समीकरणों को लेकर अटकलें और बढ़ गईं।
दिलचस्प बात यह है कि ब्रजभूषण शरण सिंह पहले भी समाजवादी पार्टी के साथ रह चुके हैं और 2009–2014 के बीच सपा सांसद रह चुके हैं। बाद में वे बीजेपी में लौटे, लेकिन मुलायम परिवार से उनके रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
हाल के दिनों में उन्होंने अखिलेश यादव की खुले तौर पर तारीफ भी की है, जिसे राजनीतिक जानकार 2027 चुनाव से पहले संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि उनका पाला बदलना इतना आसान नहीं होगा। बीजेपी से उनका दशकों पुराना रिश्ता और मौजूदा राजनीतिक समीकरण इस फैसले को जटिल बनाते हैं।
क्या संकेत मिल रहे हैं?
- बीजेपी से दूरी और नाराज़गी के संकेत
- सपा नेतृत्व के साथ नरम संबंध
- पुराने सियासी रिश्तों की वापसी की चर्चा
कुल मिलाकर, अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं है, लेकिन जिस तरह के बयान और राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, उससे साफ है कि यूपी चुनाव 2027 से पहले बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है।